मन की आवाज़
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मन की आवाज़
कविता
मन की आवाज़ कभी झूठी नहीं होती, हर दर्द की दवा इसमें छुपी होती। जब दुनिया से हार कर थक जाओ तुम, ये आवाज़ तुम्हें फिर से जीना सिखाती होती।
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