मौन
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मौन
कविता
मौन था मेरे लफ़्ज़ों का साथी यहाँ, हर बात पर जैसे लगी हो कोई सजा यहाँ। जो कह न सकी मैं, वो दिल में रह गया, ससुराल की चौखट पर मेरा हर अरमान थम गया।
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