आ लौट चलें
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आ लौट चलें
कविता
आ लौट चलें, उन राहों की ओर, जहाँ दिल से दिल की बातें हुआ करती थीं, अब भी इंतज़ार में हैं वो खामोश गलियाँ, जहाँ हमारी हंसी की आवाज़ें गूंजा करती थीं।
लेखक : Mini
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