स्वैच्छिक: एक सुकून
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स्वैच्छिक: एक सुकून
कविता
स्वैच्छिकता में खुद को पाया, सुकून का था वो सफर, भीड़ से अलग था रास्ता, न कोई डर, न कोई असर। हर कदम पे थी ख़ुशी, हर सांस में सुकून, जब अपने दिल की सुनी, तभी पाया मैंने जूनून।
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