सलाखें

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सलाखें


"यह कहानी मनोज की है, जो एक समय मुजरिम था, लेकिन जेल से रिहा होने के बाद उसने अपनी पुरानी जिंदगी को पीछे छोड़ने का फैसला किया। समाज की तिरस्कार भरी नज़रों और लोगों की जिल्लत सहते हुए भी उसने हार नहीं मानी। अपने मजबूत इरादों के साथ, मनोज ने ईमानदारी की जिंदगी जीने की ठानी। यह संघर्ष और दृढ़ संकल्प की कहानी है, जहां एक इंसान अपने अतीत से ऊपर उठकर खुद को एक बेहतर इंसान के रूप में स्थापित करने का प्रयास करता है।"

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