जब मैं जिंदा थी
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जब मैं जिंदा थी
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तब क्यों ना आए जब छिन रही थी मेरी इज्ज़त सड़क पर सुनी तो सभी ने होंगी चीखें मेरी पर नज़र अंदाज़ किया उन चीख़ों को इस कदर जैसे कुछ हुआ ही नही देख रहे थे सभी तमाशा बस निकलना बाकी था मेरा जनाज़ा
लेखक : N0_7hin9
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