सुकून या चाय

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सुकून या चाय


"सुकून या चाय...!! हाय... मेरे कुछ सपने ऐसे,, सोचकर ही दिन बन जाए... एक दिवाना तेरे हुस्न का ओर दूजी मेरी पसंदीदा चाय... एक गरम चाय की प्याली जो जिसे होठों से अपने छू कर दे,, मैं बहका बहका सा फिरूँ जो,, वो जादू मुझ पर तू कर दे,, कर ले मुझको वश में अपने,, मैं जाल में तेरे फँसना चाहू,, तु कर ले मुझको कमरे मे बन्द,, मैं आंखों में तेरी बसना चाहूं मैं चाहूं तेरे संग संग रहना, पल्लू से ले मुझे को बांध तु,, हाय दिल पर जादू कर गई तु,, लगती है मुझको चांद तू, , उस पर बनी चाय एक कप,, पीकर सुकून है मिल जाए,, सुरूर सा दौड़े रग रग में मेरी, जो हाथों से तेरे बन जाए, , Kumari megha nashiyar

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