लिबास....
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लिबास....
कविता
मोहब्बत से हटकर मोहब्बत का लिबास मैंने जाना, फरेब से परे असलियत को जब पहचाना। धोखे में है वो अभी कि आज भी वह सच्चा है...2 अब उसे कौन समझाए कि ये नकाबी दुनिया का एक हिस्सा है। - kj
लेखक : Kj
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