ज़िंदगी तबाह हो जाती हैं,
जब हम बेखुदी में पढ़कर किसी को गले लगा लेते हैं।
मजाक बन जाता हैं उस कहानी का,
जहां हम अनजानों से दिल लगा लेते हैं।
बेखुद होकर जब दिल बेखुदी में खोया जाता है,
फिर सबसे रास्ता कटने लग जाता हैं।
इस सफर का कोई किनारा नहीं हैं,
अंधेरे के अलावा अब कोई नजारा नहीं है।
- kj