कर्म ही पूज्य है
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कर्म ही पूज्य है
कविता
कर्म में अर्थ है, अर्थ में भाव है भाव निश्छल है, अंत मौत है मौत उद्धार है, और मोक्ष ही पूज्य है।
: Dikshu
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