सुनसान रात की गवाही

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सुनसान रात की गवाही


अभी रात्रि के तीन बजे है। मैं कविता के माध्यम से रात्रि के सन्नाटे और अकेलेपन का चित्रण करने का कोशिश कर रहा हूं। मैं बालकनी में बैठकर गहरी रात के वक्त अपने जीवन की खालीपन और सवालों से जूझ रहा हूं। मैं खुद को तलाशता हूं, लेकिन उत्तर नहीं मिलता, सिर्फ एक अनकही गवाही और सन्नाटा साथ रहता है।
: Golu Kumar Gupta

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