काश! मैं लड़की होता
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काश! मैं लड़की होता
कविता
इस कविता में, मैंने कल्पना की कि अगर मैं लड़की होता, तो समाज में लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव और चुनौतियों का सामना कैसे करता। मैंने महसूस किया कि लड़की होना कितना कठिन और साहसिक है, और मैंने उनकी हिम्मत और ताकत को दिल से सलाम किया।
: Golu Kumar Gupta
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