कड़वा सच
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कड़वा सच
कविता
आखिर किस पर करें भरोसा हम, अपने ही यहांँ अपनों को मीठा ज़हर पिलाते हैं। दिखावे के लिए बस करते हैं प्यार , और पीठ पीछे छुरा चलाते हैं।
: Aman
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