हमारे समाज मे भी काफी ऐसी अवधारणाए है, जो हम लोगो ने ही बिना कुछ सोचे बस सुनकर मान ली, जैसी की मर्द को दर्द नही होता है, और औरत बात बात पर रो देती है। पर क्या वास्तव मे ऐसा है? जैसे ये बात सरासर गलत है कि औरत कमजोर होती है, वैसे ही ये भी गलत बात है कि मर्द को दर्द नही होता, बस एक फिल्म को देखी उसका डायलाग सुना और उस डायलॉग का बोझ हर मर्द के ऊपर डाल दिया, ताकि वह अपनी तकलीफ बताना भी चाहै तो किसी से बता ना पाए क्योकि ये झूठ तो सबके दिमाग मे रच बस चुका है कि मर्द को दर्द नही होता, पर वास्तव मे मर्द को दर्द भी होता है, क्योंकि वो भी एक इंसान है जिसे तकलीफ होने पर दर्द होता है और अगर रोने का मन करे तो वह रोता भी है भला ही अपने आंसू छिपा ले।आज की कहानी जो कि मानव शुक्ला की है उसके माध्यम से मैं आपको मर्द के दर्द तक उस हद तक तो नही पर जितना मुझसे होगा मै कोशिश करूंगी,ताकि आप लोग एक मर्द के व्यक्तित्व को भी समझने मे मदद मिले।