रुक्मिणी, एक माँ है, जिसे उसके बच्चों ने बेरहमी से अपने ही घर से निकाल दिया है। सौभाग्य से, उसे अजय में सांत्वना मिलती है, जो एक दयालु अजनबी है। जो उसे अपने साथ ले जाता है और उसे प्यार और देखभाल देता है। उसकी बेटी सिया अपनी माँ के अधिकारों और खुशी के लिए खड़ी होती है और अजय रुक्मणी की शादी करवाना चाहती है लेकिन इस शादी के खिलाफ उसका अपना भाई आकर खड़ा हो जाता है। क्या अपने भाई के विरुद्ध जाकर सिया अपनी मां रुक्मणी और अजय की शादी करा पाएगी? क्या दिला पाएगी उसकी मां को खुशियों का हक?
जानने के लिए पर यह मेरे साथ मेरी कहानी “प्यार पचपन का”