Marital Rape (वैवाहिक दुष्कर्म)
हमारे देश में संबंध बनाने के लिए शादी का लाइसेंस जरूरी होता है इस लाइसेंस के बिना बने संबंधों को समाज सही नजर से नहीं देखता, पर क्या शादी के बाद पुरुषों का महिला पर एकतरफा अधिकार होता है औरत की अपनी खुद की कोई मर्जी नहीं होती, जब शादी दो लोग करते है, तो सब समझोते करने की उम्मीदे औरत से ही क्यो करते है?
सिर्फ मार-पीट करना, दहेज कै लिए परेशान करना, बच्चा ना होने पर परेशान करना ही महिला पर अत्याचार नही है, या किसी औरत का कोई आदमी बलात्कार करे वही सजा का हकदार नही है, बल्कि शादी के बाद आदमी द्वारा औरत के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध संबंध बनाना भी वैवाहिक दुष्कर्म अर्थात Marriteal Rape होता है, जो आज कोई नई बात नही है, बल्कि सालो से दस मे से चार महिलाओ के साथ ऐसा होता है, बस फर्क सिर्फ इतना है, कि समाज मे औरत के लिए शर्म और हया के नाम पर बनाए बंधनो मे जकडी हुई वह कभी कुछ कह ना पाई, क्योकि हमे तो यही सिखाया गया है, पति परमेश्वर है, और वो जो कहे उसे मानो, इसलिए सालो से कुछ औरत वैवाहिक दुष्कर्म सह रही है, और इसमे सिर्फ कम पढी- लिखी औरते ही नही अच्छी खासी पढी- लिखी औरते भी शामिल है , पर सब मुंह बंद किए सह रही है।
पर बदलते वक्त के साथ कुछ महिलाओ ने इसके खिलाफ आवाज उठाई तो यह बात उजागर हुई।
लोग कहते है इस तरह का व्यवहार सिर्फ कम पढे लिखे लोग ही करते है, पर आज की कहानी मे मैं आपको बताऊंगी एक पढा लिखा शहर का आदमी भी इस तरह की घिनौनी हरकत कर सकता है, और हर गांव की लडकी कमजोर नही होती।
हमारी ये कहानी है 18 साल की मासूम नंदनी की जिसकी शादी दिल्ली शहर की एक प्रतिष्ठित परिवार के बेटे राजवीर खुराना से हुई, तो चलिए पढते है नंदनी के अपने हक के लिए संघर्ष की कहानी।