झूठी उम्मीद
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झूठी उम्मीद
कविता
तुझे जाना है तो जा ।। मैं कुछ नही कहूंगी तुझे ।। ना तेरा हाथ पकड़ कर आसू भरी आखों से तुझे रुकने को कहूंगी ।।
लेखक : Nehal
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