दरकते पहाड़ !
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दरकते पहाड़ !
कविता
गवाह हूं मैं बनते जहां की, बिगड़ते समां की, मिटती दास्तान की, अडिग खड़ा हूं, अविचल खड़ा हूं, हां पहाड़ जो हूं !
: Shalini Chaudhary
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