Iiसर्दी का मौसम था। सर्दी के कारण घर सड़क का पेड़ सबने सफेद चादर ओढ़ लिया था। सॉफ्ट बर्फ ने सारे शहर को अपने आगोश में ले रखा था। और कांप कांपने वाली सर्दी, जो की बहुत ज्यादा ठंड लेकर थी। इस कांप कांपने वाली ठंड में हिमानी अंगड़ाई लेते हुए खिड़की और देखने लगी बाहर का नजारा देखकर उसके चेहरे पर मुस्कान खिल उठती है। इस पल वह बहुत प्यारी लग रही थी। इस पल उसका फोन बजता है। हिमानी जल्दी से फोन पिक अप करती है और दूसरी तरफ से आवाज आती है।
हिमानी तुम टॉप करोगी
हिमानी तुमने टॉप किया है, बहुत ही खुशी और उत्तेजना के साथ।
हिमानी सुनते ही क्या कहा,,
हिमानी, " क्या जे सच है?
दूसरी तरफ सेआवाज आती है......
हां मेरी जान मैं अभी कॉलेज की वेबसाइट चैक किया है। और हां इस बार कॉलेज वालों ने कहा है, जो पहले पोजीशन में आएगा, उसको कॉलेज की तरफ से 60000 का चेक मिलेगा।
हिमानी, " इसका मतलब मुझे यह 60000 मिलगे, oh my god मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा। क्या मैं कोई सपना देख रही हूं।
दूसरी तरफ से ऐसा ही कुछ समझ ले और हां अपना मुंह बंद करले वरना मक्खी घुस जाएगी।
ऐसा सुनते ही हिमानी जात से अपना मुंह बंद कर लेती है।
यह फोन प्रीत का था। यानी कि हिमानी की बचपन की दोस्त जो हमेशा उसके साथ रहती है। और उसके हर आए भाव को जानती थी। किस वक्त, किस बात पर किस तरह का रिएक्शन होगा, यह सब उसको पता होता था।
दोनों ऐसे ही थोड़ी देर आपस में बातें करती है। कुछ देर बातें करने के बाद फिर हिमानी बोली अच्छा चल मैं फोन रखती हूं। नाश्ता भी बनाना है।
प्रीत बोली, " ठीक है फिर जल्दी मिलते हैं। टॉपर हिमानी।
हिमानी, " ओके ठीक है बाय।"
फिर कॉल डिस्कनेक्ट कर देती है।
थोड़ी देर में हिमानी फ्रेश होकर किचन की और बढ़ती है। वहां जाकर देखते हैं, गौरव जी और हिमांशु दोनों ही किचन में नाश्ता बना रहे थे।
हिमानी, "_ यह आप लोग क्या कर रहे हो। वह भी इतनी सुबह-सुबह किचन में अगर कुछ चाहिए था, तो मुझे बता देते।
हिमांशु बोला, " ऐसे कैसे, अगर तुझको चाहिए था, तो तू बता देती। आज तुम्हारा बहुत बड़ा दिन है आज तुम ग्रेजुएट होने वाली हो,, और वैसे भी एक टॉप करने वाली टैलेंटेड स्टुडेंट को काम करना अच्छा नही लगता। हमने सोचा कि हम जैसे नजीज यह सब करेंगे।
गौरव जी बोले हिमानी के सिर पर हाथ फेरते हुए। कंग्रॅजुलेशंस, मां आज मेरी बच्ची ने आखिरकार कर दिखाया। इतनी सारी परेशानियों को पीछे छोड़कर मुझे पता है तुम्हें कोई बहुत परेशान करता है। सही से पढ़ने तक नहीं देता। बहुत काम करवाता है,, लेकिन फिर भी तुमने जो चाहा था। I am proud of you my girl।
हिमानी और गौरव जी दोनों की आंखो में नमी आने लगी। इसेेेेेेे देखकर हिमानी बोली, होए छे एक बार नाकी आरो किशु अच्छे।
बहुत हो गई इमोशनल बातें,, अरे बाबा खुशी का दिन है। आज मेरी प्यारी दीदी ग्रेजुएशन सेरेमनी है। और आप है की
पीछे से अनुराधा जी, श्रेया प्रिया सब सुन रहे थे।
अनुराधा जी बोली, "हो गया है, बुराई तो नाश्ता मिलेगा। या फिर ये ड्रामा देखकर ऐसे ही पेट भरना पड़ेगा।
यह तीनों बिल्कुल खुश नहीं थे। हिमानी के टॉप करने से जलते थे। पहले से ही क्योंकि हिमानी ने दार्जिलिंग के सबसे बड़े कॉलेज से टॉप किया था। श्रेया और प्रिया वी कॉलेज में पढ़ना चाहती थी। लेकिन उनके मार्क्स इतने अच्छे नहीं थे। इस कॉलेज में सिर्फ अमीर बच्चे जहां फिर वह जिनके मार्क्स बहुत अच्छे आया करते थे। सिर्फ उनको ही यहां एडमिशन मिलता था।
हिमानी बात को संभालते हुए बोलती है___ चलिए अब हम सब मिलकर नाश्ता करते हैं।
फिर सब लोग ने अपना-अपना नाश्ता किया नाश्ता करने के बाद सभी अपने-अपने काम पर लग गए।
हिमानी ने भी बचा हुआ काम किया,, और फिर प्यार होकर कॉलेज के लिए जाने लगी। तभी पीछे से किसी ने हिमानी को हग कर लिया। पीछे मुड़कर देखा तो हिमानी से कहा_____ दीदू आप परेशान मत हो उन लोगों की बात को दिल पर मत लो। आज आपके लिए बहुत बड़ा दिन है, और आप खुलकर इंजॉय करना किसी के बारे में मत सोचना।
हिमानी बोली, " तुम्हारे बारे में भी नहीं?"
हिमांशु बोला, " दिदू मैने ऐसा कब कहा?"
हिमानी बोली अभी-अभी तो कहा था,, और अभी भल गए।
हिमांशु बोला दीदू में बुरे लोगों की बात कही है, अपने लिए नही, और हां मैं बुरा नहीं हूं,, है ना।
हिमानी बोली, " ऐसा नहीं कहते,, बैड मैनर्स।
हिमांशु बोला, " दीदी दर्द हो रहा है,, छोड़ो मुझे, मेरी कान बड़ी हो जाएगी। तो कोई लड़की मुझे कोई बॉयफ्रेंड भी नहीं बनाएगी।
हिमांशु हिमानी से अपना कान छुड़वाता है। और वहां से भागते हुए कहता है all the best my princess, दीदी।
हिमानी ने अपने मन में ही कहा,, थैंक यू सो मच फार ऑल माय यूनिवर्स, फिर मुस्कुराते हुए बाहर चली गई। अपनी स्कूटी पर कॉलेज के लिए निकलती है।
हिमानी घर से सीधा प्रीत के घर जाती है, वहा जाकर वह डोर नॉक करती है। डोर नॉक होने की आवाज सुनकर प्रीत की मां बाहर आ जाती है और डोर को ओपन कर देती है। हिमानी को अंदर बुला लेती है, हिमानी को बैठने के लिए कह कर, किचन में चली जाती है। थोड़ी देर में वह अपने हाथ में एक बाउल लेकर बाहर आती है। और हिमानी के हाथों में बाउल पड़ा देती है। यह लो,, खास तुम्हारे लिए बनाया है।
रसगुल्ले को देखकर हिमानी के चेहरे पर तो चमक आ गई थी।
हिमानी, "रसगुला वो भी मेरे लिए,, थैंक यू सो मच मेरी प्यारी कई लव यू ( एक्साइड होते हुए)।
प्रीत, "मामा मुझे तो आप भूल ही गए, और किस खुशी में बनी है रसगुल्ले (झूठा गुस्सादिखाते हुए) ।
प्रीत की मां , "तुम्हारे लिए भी बने हैं मैं अभी तुम्हें लाकर देती हु। आज सबके लिए रसगुल्ले बनी है। आखिर हमारी हिमानी ने टॉप जो किया है। हमारी दोनों बच्चे ग्रेजुएट बन जाएंगे तो यह रसगुल्ले बनते ही रहेंगे।
प्रीत की मां ये सुनकर