यादें
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यादें
कविता
वो दिन भी क्या थे जब तुम पास थी, हर बात में बस तुम्हारी ही आस थी। तेरी हंसी में खोया रहता था हर पल, यादें वो अब बन गईं धुंधली दलदल।
: Golu Kumar Gupta
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