शीर्षक:- असफलता
हर एक औरत की यह इच्छा होती है कि उसकी शादी हो और वह अपनी ससुराल जाये। जब से वह जवानी में कदम रखती है उसको यही समझाया व पढा़या जाता है कि तुम्हें पराये घर जाना है।।
लेकिन शादी विवाह आदमी के बस से बाहर है क्यौकि जोडि़या ऊपर से बनकर आती है।
जबतक उसकी शादी नही होजाती व। अपने को अधूरी ही समझती है। ये ऐसी ही एक अधूरी औरत की कहानी है।
मंजुला अपने माता पिता की सबसे बडी़ सन्तान थी। वह पढ़ने लिखने जितनी तेज थी उतना ही उसका रूप सुन्दर नही था।
मंजुला रंग से सावली व उसके नैन व चेहरा भी सुन्दर नही थे। कालेज मे लड़के व लड़कियां उसे अनेक नामौ से पुकारती थी कोई काली कलूटी तो दूसरा उल्टा तबा कहता था।
लेकिन मंजुला कालेज की टापर थी। सभी लड़कियौ के बाय फ्रैन्ड थे लेकिन मंजुला का कोई बाय फ्रैन्ड भी नही था । उसकी किताबें ही उसकी बाय फ्रैन्ड व सहेली थी।
मंजुला ने अपनी पढा़ई के साथ कभी समझौता नहीं किया था । इसीलिए उसका चयन बैंक में मैनेजर के लिए होगया था।
मंजुला की इतनी अच्छी सरकारी नौकरी होने के बाद भी आज तक उसकी शादी नहीं हो सकी थी। सुन्दर रूप देना यह तो ईश्वर के आधीन है इसमें मंजुला का क्या दोष था। लेकिन सुन्दर न होने के कारण लड़के वाले उसे पसन्द नहीं कर रहे थे।
मंजुला के पापा ने न जाने कितने लड़के देखे थे। वह मंजुला की नौकरी देखकर शादी के लिए तैयार हो जाते थे लेकिन जब मंजुला को देखने आते और उसको रिजैक्ट करके बापिस लौट जाते।
मंजुला के कारण उससे छोटे भाई बहिन भी क्वारे ही बैठे थे। जबकि मंजुला ने अपने मम्मी पापा को बहुत प्यारसे समझाया था कि आप मेरे कारण मेरे भाई बहिनौ की शादी क्यौ रोक रहे हो। मेरी तकदीर में शायद क्वारा रहना ही लिखा है। मेरे बदले की सजा उनको क्यौ देरहे हो।
लेकिन माता पिता तो ऐसा कैसे कर सकते थे। वह सबसे पहले मंजुला को शादी करके विदा करना चाहते थे।
एक दिन मंजुला की ब्रान्च मे अखिल नाम का लड़का नयी जाइनिंग पर आया। जैसे ही उसने मंजुला के केबिन में प्रवेश किया वह अपने सामने जानी पहचानी सूरत को सामने सीट पर बैठी देखकर कुछ सोचने लगा।
मंजुला उसको बैठने के लिए बोलती उससे पहले अखिल पूछते हुए बोला," मैडम आप वही मंजुला हो जो कालेज की टापर थी ?"
" जी ! परन्तु आप मुझे कैसे जानते हो? ", मंजुला ने पूछा।
"मै भी उसी कालेज में पढा़ हू़ मेरे भाईसाहब अरुण आपके क्लास फैलो थे। आपके बिषय में मुझे वही बताते थे और आपका फोटोग्राफ कालेज की मैग्जीन में भी आया था। मै आपसे जूनियर था।" अखिल ने मंजुला को बताया।
"ओह! आप अरुण के भाई हो? हमारी ब्रांच में आपका स्वागत है।" मंजुला ने जबाब दिया।
इस तरह अखिल की जाइनिग होगयी ।मंजुला ने अखिल से उसकी फैमिली के बिषय में भी पूछा।
अखिल मंजुला से हर रोज मिल लेता था और वह उसके पास बैठकर काफी पीलेता। मंजुला भी उसके साथ मिलती रहती।
मंजुला अखिल के इस मेल जोल को प्यार समझने लगी। और फिर अखिल मंजुला के घर आने जाने लगा। जब एक दिन अखिल का सामना मंजुला की छोटी बहिन से हुआ तब वह उसे पहली मुलाकात में ही दिल दे बैठा।
मंजुला अभी तक यह सोचरही थी कि अखिल उसको चाहने लगा है और वह अखिल के साथ जीवन के सपने देखने लगी।
मंजुला सपनौ में उसके साथ सैर सपाटे पर भी जाने लगी। और उसको जीवन साथी मानकर उसके साथ अपनी गृहस्थी बसाने की सोचने लगी।
मंजुला ने सोचा कि वह उसको प्रपोज करने की पहल करदे। लेकिन वह कर नहीं पा रही थी।
मंजुला एक दिन बाजार से बापिस आरही थी तभी उसकी नजर अपनी छोटी बहिन की स्कूटी पर पडीँ जो एक पार्क के बाहर खडी़ थी। और उसी के पास अखिल का बाइक भी खडा़ था।
मंजुला के शैतान दिमाग में कुछ बिचार आया और उसने अपनी स्कूटी का यूटर्न लिया और उसने अपनी स्कूटी कुछ दूरी पर खडी़ की और उसकी चोर नजरैं कुछ खोजने लगी।
मंजुला की आँखें जो खोज रही थी आखिर में वह सच निकला क्यौकि अखिल व सीमा एक वृक्ष की ओट में बाहों में बांहें डालकर बाते कर रहे थे। मंजुला को कम से कम सीमा से ऐसी आशा नहीं थी।
मंजुला यह दृश्य देखकर एक ठन्डी आह भरकर वहाँ से बापिस आगयी और अपनी स्कूटी को स्टार्ट करके भारी मन से घर वापिस आगयी। यदि वह चाहती तो अखिल के गिरेवान में हाथ डालकर पूछ भी सकती थी कि उसने यह डबल गेम क्यौ खेला था। परन्तु वह ऐसा करके सीमा के भविष्य को अपने स्वार्थ के लिए खराब नही करना चाहती थी। इसलिए वह इसे बुरी दुर्घटना मानकर भूलने में ही अच्छा समझ रही थी।
अब मंजुला की समझ में आगया कि अखिल उसको नही सीमा को चाहता है।
दूसरे दिन रविवार था। मंजुला ने अपनी मम्मी से बात की और सीमा के लिए लड़का देखने के लिए बोला। मंजुला ने अपनी मम्मी को यह भी सलाह दी कि आप सीमा को भी पूछो कि क्या वह किसी लड़के को चाहती है?
मंजुला की समझ में आचुका था इस संसार के लोग केवल सुन्दर बदन से प्यार करते है वह सुन्दर बिचार भावनाऔ की कद्र नही करते है। इस संसार का मानव भी अजीव ही है। जब किसी अन्त्येष्टि संस्कार में जाता है तब पवित्र होने के लिए घर आकर नहाता है। जबकि बकरे जैसे जीव को काट कर खाने के बाद भी कभी अपवित्र नही होता है।
मंजुला को आब इस समाज से घृणा होने लगी थी । और अब उसने शादी न करने का फैसला कर लिया था। उसने अपनी बहिन की पसंद को पूछकर उसकी पसंद के अनुसार अखील से रिश्ता तय कर दिया।
इस रिश्ते से सीमा को खुश देखकर वह भी खुश थी।जो मंजुला अबतक अखिल के साथ अपने सपने देख रही थी आज वह अखिल उसकी बहिन के साथ हनी मून मनाने को जारहा था।
इसीलिए कहते हैं कि सपना देखना तो अपने वश में है लेकिन वह सच होगे अथवा सपने बनकर ही रहजायेंगे यह हमारे हाथ में कभी नहीं हो सकते है।
मंजुला ने अपने भविष्य के लिए अनगिनत सपने देखे थे परन्तु वह जीवन में सच न हो सके। वह पढ़ लिखकर एक अफसर तो बन गई। लेकिन उसे जीवन मे गृहस्थी बसाना में असफलता ही हाथ आई।
अब मंजुला ने अपने मन को एकाग्रचित कर लिया वह अपने को एक अधूरी व असफल औरत मानने लगी थी। शायद उसे ईश्वर ने भूल से पूरी औरत नहीं बनाया था। इसलिए वह अब एक साध्वी का जीवन जीने लगी ।
समाप्त
आज की दैनिक प्रतियोगिता हेतु
नरेश शर्मा " पचौरी "