सुरमई शाम
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सुरमई शाम
कविता
सूरज तो यूँ ही बदनाम है कसूर तो सुरमई शाम का है जिसे ज़िद है सूरज को आजमाने की मगर सूरज को भी ज़िद है शाम को अपने पास बुलाने की।
: Dikshu
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