बरसात
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बरसात
कविता
बरसात के आने पर बहार आती है, जाते हुए उदासी दे जाती है, कुसुर उन बूंदो का नही जो बरस गई, कसूर धरती का है जिसकी प्यास फिर भी रह गई।
लेखक : Charu
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