खो सी गई हु मै ।। खुद मैं या दुनिया की रहो मैं क्या पता ।।
अब मिलना चाहती हू खुद से ।। पहचानना चाहती हू खुद को ।।
बस बोहोत हुआ दूसरो के लिए उनकी पसंद का बनना अब मैं खुद की पसंद की बनना चाहती हू ।। नही चाहिए किसी का साथ बस इस अकेले पन मैं खुद को महसूस करना चाहती हू ।।