ज़माने को बदलते है
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ज़माने को बदलते है
कविता
क्यों रोज भूख के नाम पर… नए नए बे जुबां जानवर ही कटते है…! क्यों नहीं हम सब मिल कर ही… इस निर्दई ज़माने को बदलते है…!!
लेखक : Ashu
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