कसूर
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कसूर
कविता
बेइंतहा इश्क उस जालिम से, नहीं शायद उस आशिक से, जो तड़पता कहीं और है.. मचलता कहीं और है... जिस्म की चाह लिए, भटकता कहीं और है... वो गलत नही शायद, मेरा इश्क ही कसूर है ! 💔💔💔
: Shalini Chaudhary
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