कुटुंब जिनसे हमारे बड़े गहरे रिश्ते होते है, कई बार इनकी बातें चुभती भी है लेकिन मुसीबत में यही हमारे साथ भी खड़े होते है। लेकिन आज कल लोगों का बौने कुटुंबो से रिश्ते थोड़े कमजोर होते जा रहे है। लोगों के अंदर से कुटुंब के आने वाली खुशी के उस एहसास की कमी होती जा रही है। ये कहानी भी ऐसी ही है जहां रोहन शर्मा जो विदेश में पढ़ रहा था और अब वहीं रहता है उसके विचार भी ऐसे ही है। तो उसकी मां उसे समझाना चाहती है रिश्ते और रिश्तेदारों की कदर क्या वो ऐसा कर पाएंगी जानने के लिए पढ़े। कुटुंब मेरे यानी शालिनी चौधरी के साथ only on लफ्जों की कहानी पर....