दाग
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दाग
कविता
नई उम्र के सुहाने सपनो ने… ऐसे है हमे उलझाया की… सिर्फ चरित्र पर दाग नहीं लगाया… बल्कि हम खुद दूसरों के लिए एक दाग बन गए…!!
: Ashu
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