सफर कई बार आम सी गुजरती है तो कई बार परेशानी में, कभी मंजिल पर पहुंचने की जल्दी होती है, तो कभी रुत मस्तानी सी। ये कहानी भी ऐसी ही है जहां वरुण ठाकुर का एक सफर उसके लिए ऐसे यादगार बन गया की वो हर सफर में उस सफर को याद करता है। तो क्या हुआ था उस सफर में जिसने वरुण ठाकुर पर ऐसा असर किया। जानने के लिए पढ़े सफर की वो हमसफर। मेरे यानी शालिनी चौधरी के साथ only on लफ्जों की कहानी पर !