एक तरफा प्यार
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एक तरफा प्यार
कविता
प्यार किया है मैंने इसमें कोई चोरी नही है… तुम्हारे संग ही दिल को सुकून मिले ये जरूरी नहीं है…! क्या जानो तुम एक तरफा प्यार की कीमत को… ये प्यार है जनाब हर बार दो तरफा हो ये ज़रूरी नही है…!!
लेखक : Ashu
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