अहम
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अहम
कविता
अहम ने लोगों को है खूब रुलाया… अपना पराया भी समझ ना आया…! अहम में आकर लोगों के अच्छे खासे… जीवन का भी विनाश हो गया…!!
लेखक : Ashu
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