आंसू
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आंसू
मेरी डायरी
मेरे आंसू के भी क्या कहने, ये कभी भी बह जाते हैं, जितना रोकू इन्हे, ये रुक ही नहीं पाते हैं,
: आरुषि ठाकुर
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