हर नारी एक वीरांगना
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हर नारी एक वीरांगना
कविता
नारी की बात निराली है। बाहर से कोमल अंदर से कठोर मगर ऊपर से कोमल हृदय वाली है।।
लेखक : nishi_bhatnagarr
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