गुजरे हुए लम्हों की
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गुजरे हुए लम्हों की
कविता
गुजरे हुए लम्हों की किताब सा हैं तू...! मेरी ज़िंदगी में ख्वाब सा हैं तू...!
लेखक : Komal
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