इन ख़ामोश रातों में...!
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इन ख़ामोश रातों में...!
साप्ताहिक प्रतियोगिता
कुछ सुकून सा हैं इन ख़ामोश रातों में...! कुछ दर्द सा हैं इन खामोश रातों में...! कुछ दिल रोता सा है, इन खामोश रातों में...! कुछ हम तन्हा से है, इन खामोश रातों में...!
लेखक : Komal
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