नज़राना–ऐ–इश्क

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नज़राना–ऐ–इश्क


पता नहीं आप सबको कैसी लगेगी मेरी कविता। बस अपने अल्फाजों से उन लम्हों को पिरोने की कोशिश की है, जो सबसे इंपोर्टेंट मूवमेंट होता है एक प्यार करने वाले के लिए। और उसके दिल में तरह तरह की कश्मकश होती है। फिर भी वो खुद को समझा कर खुद को मजबूत कर अपने कदम आगे बढ़ाने को तैयार होता है।
: Ashu

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