नज़राना -ए-इश्क

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नज़राना -ए-इश्क


दिल चाहता है कि आज यह सारे अल्फाज़ और यादें सीने में दफ़न हो जाए । कंबख्त यह यादें पीछा ही नहीं छोड़ती

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