नज़राना -ए-इश्क
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नज़राना -ए-इश्क
कविता
दिल चाहता है कि आज यह सारे अल्फाज़ और यादें सीने में दफ़न हो जाए । कंबख्त यह यादें पीछा ही नहीं छोड़ती
लेखक : Heart Throb_01727
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