स्वयं से स्वयं की ओट में...!!
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स्वयं से स्वयं की ओट में...!!
कविता
इक आड़ है जो तूफ़ा रोक लेती है, भीतर ही उथल पुथल झेल लेती है...!!
लेखक : Nayii Kalam
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