सुमित्रा 30 साल की उम्र और उस का कोई अपना नहीं था | काफी सोच समझ कर उसने अपनी एक सहेली और दूर के रिश्ते में लगने वाली बहन आनंदी को उसकी 5 साल के बेटी के साथ अपने घर पर बुला लिया | आनंदी विधवा और उसकी उसकी बेटी के सिवा कोई भी नहीं था | उसके रिश्तेदारों में चाल चल कर उस से उस का घर छीन लिया और अब वो लोग रहने के लिए जगह ढूंढ रही थी | आनंदी भी अकेली थी और सुमित्रा भी इसलिए दोनों को एक दूसरे का सहारा मिल गया | दोनों मिलकर आनंदी की बेटी जीविका को पालने लगे | समय के साथ जीविका बड़ी होती गई और इसी तरह 15 साल बीत गए | आज जीविका 20 साल की हो चुकी थी और वह तो शहर के कॉलेज में पढ़ती थी वही हॉस्टल में रहने की वजह से जीविका के स्वभाव में घमंडीपन था और वो अपनी मां और सुमित्रा को कुछ भी नहीं समझती थी | अपने दोस्तों के पीछे लग कर वो भी एक अच्छा लाइफ स्टाइल चाहती थी जो उसकी मां और उस की मौसी सुमित्रा उसे नहीं दे पा रहे थे |
एक दिन जब जीविका अपने घर पर उन लोगों से मिलने आई छुट्टी के दिन तो उसने अपनी मां आनंदी से बात करी कि वो लोग सुमित्रा का ये घर बेच दे | सुमित्रा का घर काफी बड़ा था और ये सब और उसकी जमीन वगैरा सब सुमित्रा के नाम पर थी | जीविका चाहती थी का आनंदी सुमित्रा से बात करें और उसे सब कुछ जीविका के नाम करने को बोले | लेकिन आनंदी ऐसा नहीं कर सकती थी क्योंकि सुमित्रा ने उनके बुरे वक्त में उन्हें सहारा दिया था और अगर वो ऐसे जीविका के बारे में सुमित्रा से बात करेगी कि तो वो साफ मना कर देगी क्योंकि जीविका के साथ उसका कोई रिश्ता नहीं था | आनंदी के लाख समझाने के बाद भी जीविका ने उसकी एक नहीं सुनी और गुस्से में आनंदी से कहा , " अगर आपने उनकी जायदाद मेरे नाम नहीं करवाई तो मैं ये घर छोड़कर चली जाऊंगी और दोबारा यहां वापस नहीं आऊंगी आप बताइए आपको कौन जरूरी है मैं या सुमित्रा मौसी ?"
आनंदी और तो कुछ नहीं कर सकती थी उसने जीविका से कुछ दिन का टाइम मांगा और फिर सुमित्रा से बात करने की कोशिश करी लेकिन काफी हिम्मत करने के बाद भी वो सुमित्रा से बात नहीं कर पाई | एक दिन गुस्से में आकर जीविका ने सुमित्रा के खाने में जहर मिला दिया और सुमित्रा की खाना खाने के बाद हालत काफी खराब हो गई थी | लेकिन टाइम पर उसे अस्पताल ले गए और उसकी जान बच गई |
सुमित्रा को पता चल गया था कि उसके खाने में जहर मिलने वाला कोई और नहीं बल्कि जीविका ही है | उसने अस्पताल के रूम में जीविका और आनंदी को अंदर बुलाया और उनसे कुछ बात करने को कहा | जीविका करते हुए वहां पर खड़ी थी |
वो कुछ कहती थी उससे पहले सुमित्रा ने कहा , " एक बार पूछ तो लेते बेटा मैंने वो जायदाद वैसे भी तेरे नाम कर दी थी , मेरा तुम्हारे सिवा और था ही कौन |" " लेकिन ये सब करके तुमने साबित कर दिया कि अपने अपने ही होते हैं पराए कभी अपने नहीं हो सकते |" " आज तक जिन लोगों को मैं अपना समझती थी आज मेरे वो अपने पराए हो गए |"