मर्यादा से परे : जब रिश्ते बदल गए
यह कहानी है एक ऐसी लड़की की जिसकी ज़िंदगी बाहर से जितनी सीधी और शांत दिखती है,
अंदर से उतनी ही उलझी और बेबाक है। समाज के बनाए नियम, परिवार की मर्यादा और रिश्तों की सीमाएं सब कुछ एक तरफ
और उसके दिल के अंदर धधकती अनकही चाहत दूसरी तरफ।
माइके से लेकर ससुराल तक, भाई से लेकर पति, ससुर और ननद तक... चार-दीवारी के पीछे छिपे कई रूप और ढकी हुई रातें जब बाहर आती हैं, तो रिश्तों की पूरी परिभाषा ही बदल जाती है।
यह सिर्फ एक औरत की कहानी नहीं है, बल्कि उसके हर उस रूप, हर उस तड़प और हर उस राज़ की दास्तान है जो मर्यादा की हर हद को पार कर जाती है।
क्या होगा जब अपनों के बीच का यह गुप्त खेल और गहरा होता जाएगा ?