किस्मत की साज़िश से तो एक बार बचा जा सकता है लेकिन अपनों की हुई साज़िश से कभी नहीं बचा जा सकता, ऐसी ही साज़िश की शिकार हुई वसुधा.. 17 साल की मासूम वसुधा क़ो उस रिश्ते से बंध दिया जाता है जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की और उसे मज़बूर कर दिया जाता है ऐसा फैसला लेने पर जो उसकी किस्मत बदल के उससे सब कुछ छीन लेता है, वही अभिराज सिसोदिया जिसने अपनों की खातिर कर दिया वासुधा क़ो बर्बाद और करता है उसके कोख का सौदा आखिर क्या मज़बूरी थी की वसुधा क़ो अपने से 15 साल बड़े आदमी के साथ बधाना पड़ता है एक ऐसे रिश्ते मे जिसमे उसकी मर्जी थी ही नही? और क्यों किया अभिराज सिसोदिया ने वसुधा के कोख का सौदा ? जानने के लिए पढ़िए "Vasudha - Sauda Kookh Ka