निर्मोही ( नफ़रत से मोहब्बत )
एक लड़की रोती हुई कहती है, क्यों किया तुमने ऐसा? क्या मिला मुझे तोड़ कर तुम्हें वैराग्य भारद्वाज, "ये कहते हुए उसके लब्ज कठोर हो गए थे। प्यार मे धोखा देते तो जी लेती। पीठ पीछे वार करते तो जी लेती। मुझसे मेरा सब कुछ ले लेते तो जी लेती।
लेकिन तुमने तो मुझसे वो छीन लिया जिसकी कल्पना मैंने नही की थी। उसके गिरेवान क़ो पकड़ती हुई कहती है, कुसूर क्या था मेरा वैराग्य भारद्वाज!! क्या कुसूर था मेरा!!चीखती कर उसे झनझोड़ती हुई कहती है।
उसके बालों क़ो जोड़ से पकड़ कर उसका चेहरा अपने करीब करता हुआ कहता है,"मैथिलि वत्स "तुम्हारे कुछ भी कहने से मुझे कोई फर्क नही पड़ता। साम, दाम, दंड, भेद मोहब्बत और जंग मे सब जायज है।" आखों मे आंसू लिए हुए मैथिलि, वैराग्य क़ो देखती है, क्योंकि उसने बहुत जोरों से उसके बालों क़ो पकड़ रखा था।
वो आंसू भरी मुस्कुराहट के साथ कहती है, मैथिलि वत्स किसी का उधार नही रखती और सब कुछ ब्याज के साथ लौटाती है। तुम्हें भी लोटाउंगी। आज वक़्त तुम्हारा इसलिये तुम्हारा दिया हर दर्द सिर्फ मेरा!!कल वक़्त मेरा लेकिन मेरा दिया कुछ भी तुम्हारा नही होगा। क्योंकि इस दर्द की तपीश ही काफ़ी है तुम्हारी रूह क़ो जलाने के लिए।
वो जोर हँसते हुए कहता है, दर्द से तप कर बना है ये वैराग्य भारद्वाज। जिसे कोई दूसरा दर्द पिघला नही सकता। अब तुम रोओगी, तड़पोगी लेकिन इस हवेली मे सुनने वाला कोई नही होगा। तुम अकेली तन्हा यहाँ जीवन बिता दोगी।वो हंसती हुई अपनी दर्द भरे आवाज़ मे कहती है ----
मेरी बेचैनियाँ अगर तुझे सुकून देती है तो जा दिया तुझे सुकून!!
मेरी आखों के आंसू तुझे ठंडक पहुंचते है तो जा दी तुझे ये ठंडक!!
मेरी तन्हाई तुझे महफ़िल देती है तो जा दी तुझे महफ़िल!!!
सब कुछ दिया तुझे.... तू जो चाहे मांग ले..... या छीन ले..... कसम है मुझे मेरी पाक मोहब्बत की..... तुझे महरूम ना कर दिया मोहब्बत से तो मेरा नाम पाकीजा नही......!!!मैथली रोती हुई उससे धका देकर अपनी बालों क़ो छुड़ा देती है।
इसकी वजह से,वैराग्य की मुठियों मे उसके बाल आ जाते है. और दर्द ..के साथ हँसते हुए कहता है,
देने वाले का क्या खुब हुनर देखा है पीठ मे खंजर आखों मे मोहब्बत देखा है,
नही दरकार मुझे तेरी सुकून सी भरी ठंडक की,
मैंने खुद क़ो शौलो मे जला रखा........ मत खा कसम मोहब्बत की..महरुमियत की ...
पाकिजगी का दामन मोहब्बत ने छिपा रखा है......
कहते हुए तेजी से उस कमरे से निकल जाता है। मैथली वही फिर गिर कर रोने लगती है।
कंटिन्यू......