क्या होता है जब एक तरफ जिंदगी का सबसे बड़ा तनाव हो और दूसरी तरफ बोर्ड परीक्षा की जिम्मेदारी?
काजल के घर में दादाजी की गंभीर स्थिति के कारण बिखराव का माहौल था। पढ़ाई में मन नहीं था, फिर भी भारी दिल से वे परीक्षा देने बैठीं। लेकिन जब बात उनके पसंदीदा विषय—ड्राइंग—की आई, तो एक चमत्कार हुआ।
कागज़ पर खींचती हर एक रेखा ने सिर्फ तस्वीर नहीं बनाई, बल्कि उनके बिखरे हुए मन को समेटना शुरू किया। स्वैच्छिक रूप से अपने जुनून में डूब जाने की इस सच्ची दास्तान को जानने के लिए पढ़िए "रंगों का मरहम"—जो सिखाती है कि सुकून बाहरी परिस्थितियों में नहीं, अपने अंदर के रंगों को ढूँढने में है।