सभी पाठकों से अनुरोध है कि अपने विचार और कहानी की कमियां जरूर बताएं ताकि आगे की कहानियों में सुधार किया जा सके. तो चलिए शुरू करते हैं।
यह कहानी लगभग 5 वर्ष पुरानी है। मेरी पत्नी मोनिका को सुबह 4:00 बजे फोन आया कि उसके ताऊ जी (पिता के बड़े भाई) का स्वर्गवास हो गया है.
खबर सुनकर ही पत्नी विचलित हो गई. पत्नी के रोने की आवाज सुनकर मेरी आंखें खुलीं तो मुझे भी इस दुखद खबर का पता चला।
आनन-फानन में पत्नी के मायके जाने की तैयारियां शुरू हुईं और 1 घंटे के भीतर ही हम दोनों अपनी कार से निकल भी गए।
मेरठ से लुधियाना के सफर में मेरी पत्नी मोनिका के कई बार आंसू ढलक आये क्योंकि उसके मायके में संयुक्त परिवार है तो आपस में लगाव होना स्वाभाविक ही है.
हालांकि 5 घंटे के सफर की थकान मुझपर भी हावी थी मगर वहां का गमगीन माहौल देखकर मैं भी परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अपने ताऊ ससुर के अंतिम संस्कार में शामिल हो गया।
धीरे-धीरे परिवार के सभी सदस्य वहां पहुंच गए। दोपहर को 2:00 बजे अंतिम संस्कार कर दिया गया।
तब तक थकान इतनी हो गयी थी कि घर आकर स्नान करने के बाद कब नींद आ गई पता ही नहीं चला।
रात्रि भोज के समय भी जब मेरी आंख खुली तब तक बचे हुए कुछ मेहमान भी आ रहे थे.
मैंने मोनिका से पूछा कि वापस अभी चलना है या सुबह चलोगी?
इतना बोलते ही मेरी सासू मां मुझ पर गुस्सा करने लगीं और बोलीं- कम से कम ऐसे में तो लड़की को कुछ दिन मायके में रहने दो?
सासू मां की स्नेहपूर्ण डांट सुनकर मैंने मोनिका को वहीं छोड़ने का निर्णय किया और अगले दिन सुबह अपनी कार से अकेला ही घर वापस आ गया।
अब 13 दिन के लिए मोनिका अपने मायके में ही रहने वाली थी और मेरी शादी के बाद यह पहला मौका था जब मुझे मोनिका के बिना अकेले इतने दिन और रात दोनों ही काटने थे।
मेरे लिए यह समय किसी सज़ा से कम नहीं था मगर परिस्थिति के आगे हम दोनों ही नतमस्तक थे।
शुरू के चार-पांच दिन तो बच्चों के साथ खेलते खेलते और मोनिका को याद करते बीत गए. फिर उसके बाद धीरे धीरे विरह की ज्वाला बहुत तेजी से धधकने लगी।
दसवां दिन आते आते तो मेरे लिए एक-एक पल काटना मुश्किल हो रहा था।
मैं और मोनिका रोज एक दूसरे से फोन पर बात करते थे. अगर मौका लग जाता तो फोन पर ही थोड़ा बहुत कामक्रीड़ा का आनंद भी ले लेते।
मगर यह तो उस आनंद का एक प्रतिशत भी नहीं था जो मोनिका के मेरी बांहों में होने के बाद मिलता था।
मेरी तो रातों की नींद भी उड़ चुकी थी। अब अक्सर मैं दिन और रात जागता रहता।
कई बार मोनिका मुझे डांट भी चुकी थी मगर मैं क्या करूं कुछ किये नहीं बन रहा था। मुझे तो उसी के नग्न बदन से चिपक कर सोने की आदत पड़ी हुई थी। उसके बिना कैसे नींद आती?