लोग क्यों बदल जाते हैं?
क्या लोग सचमुच बदल जाते हैं, या समय उनके बनावटी चेहरे से पर्दा हटा देता है?
यह पुस्तक रिश्तों, समय, स्वार्थ, उम्मीदों और इंसानी व्यवहार की गहरी पड़ताल है। इसमें भावनाओं के साथ-साथ उन कारणों को समझने की कोशिश की गई है, जो किसी इंसान को पहले जैसा नहीं रहने देते।
यदि कभी आपने भी किसी अपने के लिए यह कहा है—"तुम पहले जैसे नहीं रहे..."—तो यह किताब आपके उसी अनकहे सवाल का जवाब खोजने का एक प्रयास है।
हर बदलाव के पीछे एक कहानी होती है... आइए, उसे समझते हैं।