प्रीशा—32 साल की एक बिंदास, अल्हड़ और बेहद जीवंत महिला, जिसकी खूबसूरती में एक महकते हुए फूल सा यौवन और बहती नदी सी रवानी है। कॉर्पोरेट दुनिया की इस भागदौड़ में उसकी और उसके पति उमेश की सात साल पुरानी शादीशुदा ज़िंदगी हर मायने में परफेक्ट थी। बेडरूम के बंद दरवाजों के पीछे उनका शारीरिक रिश्ता किसी पैशनेट थ्रिलर जैसा था। दोनों खुश थे, तृप्त थे।
लेकिन एक गंभीर सुबह, डॉक्टर की एक मेडिकल रिपोर्ट ने उनकी हँसती-खेलती दुनिया को हिलाकर रख दिया। रिपोर्ट में साफ़ था—उमेश कभी बाप नहीं बन सकते।
एक मिडिल-क्लास वर्किंग कपल के सामने अब समाज के ताने थे और प्रीशा की कोख का वो खालीपन, जो अब चीखने लगा था। माँ बनने की तड़प और उमेश की बेबसी के बीच, उनके बेडरूम में एक तीसरे इंसान की एंट्री होती है। एक ऐसा नया और चुंबकीय किरदार, जो प्रीशा को मातृत्व का सुख देने के लिए आता है।
पर क्या यह सिर्फ एक समझौता रहेगा? या फिर प्रीशा की बंजर ज़मीन पर उस नए मर्द की छुअन, मर्यादा और वासना की सारी सरहदें तोड़ देगी? क्या उमेश अपनी ही आँखों के सामने अपनी पत्नी को किसी और की बाहों में सौंप पाएगा?
कामुकता, भावनाओं और बेहद बोल्ड फैसलों से बुनी हुई एक ऐसी कहानी, जो आपको आखिरी पन्ने तक बांधे रखेगी।