रुकना मना है
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रुकना मना है
कविता
कविता
थक गया है मन, पर पैरों को बता, रुकना मना है, अभी चलना बाकी है। सपने जो देखे थे रातों में जाग कर, उनको हकीकत में ढलना बाकी है।
: Kajal Parveen
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