ख्वाहिश और उर्वशी जुड़वां बहनें हैं, दिखने में इतनी सेम कि अगर दोनों को एक साथ खड़ा कर दिया जाए तो कोई भी धोखा खा जाए। लेकिन स्वभाव के मामले में दोनों एक-दूसरे से बिल्कुल उलटी हैं। ख्वाहिश जो कि बड़ी बहन है, घर वालों की पाबंदियों और पढ़ाई के सख्त माहौल में रहने की वजह से बहुत सीधी, मासूम और डरपोक है। उसका मन आर्ट में लगता है, पर घर वाले उसे सिर्फ पढ़ाई करने पर मजबूर करते हैं। वहीं दूसरी तरफ छोटी बहन उर्वशी एकदम धाकड़ और निडर है, जिसे घर से पूरी छूट मिली हुई है और उस पर ज़बरदस्ती आर्ट थोपी जा रही है जिसमें उसे ज़रा भी मज़ा नहीं आता।
अपनी-अपनी इस घुटन से तंग आकर दोनों बहनें एक रास्ता निकालती हैं। वे एक-दूसरे की जगह और क्लास बदलने का फैसला करती हैं। शक्ल एक जैसी होने की वजह से उनका यह प्लान काम भी कर जाता है, पर असली कहानी तब शुरू होती है जब इस पहचान के खेल के बीच प्यार की एंट्री होती है।
आर्ट क्लास में उर्वशी बनकर गई ख्वाहिश की मुलाकात कॉलेज के सबसे डरावने और सिरफिरे लड़के से होती है, जिससे पूरा कॉलेज डरता है और कोई उससे बात करने की हिम्मत तक नहीं करता। वह लड़का सोचता है कि यह वही धाकड़ लड़की है, लेकिन धीरे-धीरे जब वह उसके धाकड़ रूप के पीछे छुपी ख्वाहिश की असली मासूमियत और डर को देखता है, तो उसकी तरफ खिंचता चला जाता है। दोनों के बीच एक बहुत ही अनोखा रिश्ता बनने लगता है।
दूसरी तरफ, ख्वाहिश की जगह पढ़ाई वाली क्लास में गई उर्वशी की मुलाकात एक बेहद सुलझे और शरीफ लड़के से होती है। उस लड़के को लगता है कि यह सीधी-सादी ख्वाहिश है, लेकिन उर्वशी का बेबाक और धाकड़ अंदाज़ देखकर वह उस पर फिदा हो जाता है।
दोनों बहनें अपने-अपने पार्टनर्स के साथ बहुत खुश होती हैं, पर चेहरा एक होने की वजह से सब कुछ उलझने लगता है। लड़कों के मन में भारी कन्फ्यूजन पैदा होने लगता है कि वे आखिर किससे प्यार करते हैं। और फिर जब धीरे-धीरे सच बाहर आने लगता है, तो खेल गलतफहमियों में बदल जाता है। लड़कों को लगता है कि उनके जज्बातों के साथ खिलवाड़ हुआ है और "किसने किसको धोखा दिया" के इस ड्रामे में दोनों बहनों के रिश्ते और उनके प्यार, सब पर एक बड़ा सवालिया निशान लग जाता है।