प्रिय डायरी... जो किसी से कह न सकी
हर दिन एक नया पन्ना, एक नया एहसास, और एक नया सच।कुछ बातें... होंठों तक आकर भी लौट जाती हैं।कुछ आँसू... मुस्कान के पीछे छिप जाते हैं।और कुछ दर्द सिर्फ़ डायरी के पन्नों में साँस लेते हैं।यह किसी परियों कीकहानी नहीं...यह एक ऐसी लड़की की डायरी है जिसने सबकी बातें सुनीं, लेकिन अपनी बात कभी किसी से कह नहीं सकी।उसकी हर मुस्कान के पीछे एक राज़ है...हर पन्ने पर एक अधूरा सपना...हर तारीख़ के पीछे एक ऐसा सच...जो शायद उसने खुद से भी छिपाकर रखा था।अगर कभी आपको भी लगा हो कि दुनिया आपको समझ नहीं पाई...
अगर कभी आपकी आँखों ने वो आँसू छिपाए हों जो किसी ने नहीं देखे...तो शायद...यह डायरी आपकी भी कहानी है।आइए...मेरे साथ उन पन्नों को पलटिए...
जहाँ हर शब्द दिल से निकला है,और हर ख़ामोशी एक कहानी कहती है।