रावतगढ़ राज्य राजस्थान का चारों तरफ बीहड़ और पहाड़ों से घिरा हुआ छोटा सा सुंदर सा एक गांव, जहां आज भी आजादी के इतने वर्षों बाद परंपरागत रूप से हर राजसी प्रथा को निभाया जाता है । पूरे गांव के लोग अपनी खुशी से और राज दरबार के प्रति अपनी स्वामित्व भक्ति से इस परंपरा का पालन करते हैं, लेकिन इस राज दरबार से जुड़ा हुआ है एक ऐसा श्राप, की राजमहल का जो भी शासन बनता है अपनी सुहागरात के अगले दिन ही उसकी पहली दुल्हन की हो जाती है मौत, जहां राजमहल में एक दिन पहले मनाई जाती है खुशियां दूसरे दिन छा जाता है मातम, एक दिन पहले खुशी में बजाए जाते हैं ढोल नगाड़े वहीं दूसरे दिन गूंजती है रोने की आवाज़ें, आखिर क्या है इस श्राप के पीछे की सच्चाई जिसकी वजह से राजमहल के शासक बनते ही किसी भी राजकुमार को बेटी देने से कतराते हैं सभी लोग, आखिर क्या है इस श्राप के पीछे की सच्चाई यह जानने के लिए जुड़े रहिएगा मेरी इस रचना के साथ उम्मीद करती हूं आपको यह रचना काफी पसंद आएगी,,, 😊🙏